2014 लोक सभा चुनाव प्रचार अपने शबाब पर था. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल पर पूरे देश की नज़र थी क्योंकि भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी वाराणसी से भी चुनाव लड़ रहे थे.
इस फ़ैसले की वजह से समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ने के लिए बगल के आज़मगढ़ पहुँच गए थे.
पाँच साल पहले मई महीने की तपती हुई उस दोपहर, हम सब सिर पर गमछा बांधे आज़मगढ़ में मोदी की एक रैली में उन्हें सुन रहे थे.
उन्होंने मंच से कहा था, "प्रदेश में बाप-बेटे की सरकार है और केंद्र में माँ-बेटे की सरकार है. आप बताइए आपके जीवन में दस साल में कोई बदलाव आया है क्या? आप मुझे मज़बूत सरकार दीजिए, किसानों की और देश की दिशा और दशा सुधार दूँगा".
मोदी के लैंड करने से कोई दस मिनट पहले फूलमती नाम की महिला मिली, जिनसे धूप बर्दाश्त नहीं हो पा रही थीं और वे अपने कुनबे के साथ वापस जा रही थीं.
उन्होंने कहा, "क्या होने वाला है, ये होने वाला है कि जीत लिंहिए, अपना घरे चल दिहीनए, कांव-कांव कर के निरहुवा चल दिहीनए, और मरिहे जनता अपने में."
इसी समय प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंच से अपना भाषण दे रहे थे और कह रहे थे, "इस बार तो कमल खिलाना है आज़मगढ़ में".
थोड़ी देर बार मोदी के भाषण का प्रमुख निशाना था समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का महगठबंधन जिसे उन्होंने 'महामिलावटी महगठबंधन' बताया. किसानों की दशा और दिशा से ज़्यादा समय 'पाकिस्तान को सबक़ सिखाने' और 'राष्ट्रहित की रक्षा' करने वाले बयानों में बीता.
12 मई को लोक सभा चुनावों के तहत छठे चरण का मतदान होना है और इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश की आज़मगढ़ सीट ख़ासी अहम बताई जा रही है.
हमेशा की तरह इस बार भी आज़मगढ़ के चुनावी समीकरण बेहद दिलचस्प हैं.
आज़मगढ़ में चुनाव आमतौर से जाति और धर्म की दूरबीन से परख कर होते आए हैं.
यहाँ एक तरफ़ अल्पसंख्यकों की अच्छी आबादी है तो दूसरी तरफ़ पिछड़े वर्ग की आबादी भी ख़ासी है.
पिछली बार अगर मुलायम सिंह यादव मैदान में थे तो इस बार उनके बेटे अखिलेश महागठबंधन के उम्मीदवार हैं.
कांग्रेस पार्टी ने यहाँ इस बार अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है. इलाक़े के जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने भी अपना कैंडिडेट ढूँढा.
पार्टी ने एक स्थानीय लेकिन बेहद लोकप्रिय भोजपुरी गायक दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को मैदान में उतारा है जिनके कैम्पेन की ख़ासी चर्चा हो रही है.
शहर के बीचोंबीच अखिलेश के एक समर्थक, आनंद कीर्ति बौद्ध से बात हुई.
उन्होंने कहा, "वो क्या है, दुश्मन भोला-भाला लगता है, मगर अंदर से कसाई के समान होता है. एक तीर से तेरह निशाना इसलिए भाई-भाई को, अहीर-अहीर से लड़ा दिया".
आज़मगढ़ जिले का अपना एक प्रगतिशील इतिहास भी रहा है जिसमें शिबली नोमानी और कैफ़ी आज़मी जैसे दिग्गजों की गिनती होती है.
शहर से दूर लेकिन संसदीय क्षेत्र के भीतर आने वाले मुबारकपुर को ही ले लीजिए जहाँ का हथकरघा उद्योग एक ज़माने में विश्व विख्यात हुआ करता था.
घर-घर पावरलूम चला करती थीं और लोगों के मुताबिक़ ख़ुशहाली थी.
मुलाक़ात जमाल अहमद से हुई जिनकी साड़ी की दुकान है और पीछे पावरलूम मशीन बंद पड़ी है.
उन्होंने कहा, "बम धमाके और आतंकवाद के फ़िज़ूल मामलों की वजह से हमारे मुबारकपुर को तो नज़र लग गई. नोटबंदी ने दोहरी मार दे डाली. अब सोच रहे हैं किसी और व्यापार की तरफ़ बढ़ें, वरना खाने के लाले पड़ने लगेंगे".
ग़ौर करने वाली बात ये भी है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में आज़मगढ़ एकमात्र ऐसी सीट थी जिस पर साल 2014 की 'मोदी लहर' का असर नहीं दिखा था.
Friday, May 10, 2019
Tuesday, April 23, 2019
सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकार को निर्देश- बिलकिस बानो को नौकरी, घर और 50 लाख रु. मुआवजा दें
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि 2002 गुजरात दंगों में दुष्कर्म पीड़ित बिलकिस बानो को 50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। अदालत ने मंगलवार को गुजरात सरकार से कहा कि वह नियमों के मुताबिक बिलकिस बानो को एक सरकारी नौकरी और आवास भी मुहैया कराए।
3 मार्च, 2002 को गोधरा दंगों के वक्त अहमदाबाद के रंधिकपुर में 17 लोगों ने बिलकिस के परिवार पर हमला किया था। इस दौरान 7 लोगों की हत्या कर दी गई थी। बिलकिस के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। उस वक्त वे 5 महीने की गर्भवती थीं।
गलत जांच करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करे सरकार- कोर्ट
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 29 मार्च को बिलकिस बानो मामले में गलत जांच करने वाले 6 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने को कहा था। अपने फैसले में कोर्ट ने ये कहा था कि उन्हें सेवा में नहीं रखा जा सकता।
मामले में 12 दोषियों को उम्रकैद की सजा
21 जनवरी, 2008 को मुंबई की कोर्ट ने 12 लोगों को मर्डर और गैंगरेप का आरोपी माना था। इसके बाद ट्रायल कोर्ट की ओर से सभी को उम्रकैद की सजा दी गई थी। सभी आरोपियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 4 मई 2019 के फैसले में सामूहिक बलात्कार के इस मामले में 12 दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। कोर्ट ने पुलिसकर्मियों और चिकित्सकों सहित सात व्यक्तियों को बरी करने का निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया था।
इस पर राहुल की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोर्ट ने उनसे सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा था जो उन्होंने दिया। कोर्ट ने उन्हे नोटिस नहीं जारी किया था। चीफ जस्टिस ने कहा कि आप कह रहे हैं कि नोटिस नही जारी हुआ तो अब नोटिस दे रहे हैं।
राहुल के खिलाफ दायर याचिका रद्द नहीं
इसी के साथ कोर्ट ने राहुल की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राहुल के खिलाफ दायर याचिका रद्द करने की मांग की थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमें लगता है कि याचिका पर राहुल को नोटिस जारी किया जा सकता है। उन्होंने रजिस्ट्रार को सुनवाई मंगलवार को रखने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई थी पुनर्विचार याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 के फैसले में राफेल डील को तय प्रक्रिया के तहत होना बताया था। अदालत ने उस वक्त डील को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने डील के दस्तावेजों के आधार पर इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं। इनमें कुछ गोपनीय दस्तावेजों की फोटो कॉपी लगाई गई थीं। इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र की ओर से आपत्ति दर्ज कराई थी थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के तहत विशेषाधिकार वाले गोपनीय दस्तावेजों की प्रतियों को पुनर्विचार याचिका का आधार नहीं बनाया जा सकता। शीर्ष अदालत ने उनकी यह दलील खारिज कर दी थी।
3 मार्च, 2002 को गोधरा दंगों के वक्त अहमदाबाद के रंधिकपुर में 17 लोगों ने बिलकिस के परिवार पर हमला किया था। इस दौरान 7 लोगों की हत्या कर दी गई थी। बिलकिस के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। उस वक्त वे 5 महीने की गर्भवती थीं।
गलत जांच करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करे सरकार- कोर्ट
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 29 मार्च को बिलकिस बानो मामले में गलत जांच करने वाले 6 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने को कहा था। अपने फैसले में कोर्ट ने ये कहा था कि उन्हें सेवा में नहीं रखा जा सकता।
मामले में 12 दोषियों को उम्रकैद की सजा
21 जनवरी, 2008 को मुंबई की कोर्ट ने 12 लोगों को मर्डर और गैंगरेप का आरोपी माना था। इसके बाद ट्रायल कोर्ट की ओर से सभी को उम्रकैद की सजा दी गई थी। सभी आरोपियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 4 मई 2019 के फैसले में सामूहिक बलात्कार के इस मामले में 12 दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। कोर्ट ने पुलिसकर्मियों और चिकित्सकों सहित सात व्यक्तियों को बरी करने का निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया था।
इस पर राहुल की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोर्ट ने उनसे सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा था जो उन्होंने दिया। कोर्ट ने उन्हे नोटिस नहीं जारी किया था। चीफ जस्टिस ने कहा कि आप कह रहे हैं कि नोटिस नही जारी हुआ तो अब नोटिस दे रहे हैं।
राहुल के खिलाफ दायर याचिका रद्द नहीं
इसी के साथ कोर्ट ने राहुल की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राहुल के खिलाफ दायर याचिका रद्द करने की मांग की थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमें लगता है कि याचिका पर राहुल को नोटिस जारी किया जा सकता है। उन्होंने रजिस्ट्रार को सुनवाई मंगलवार को रखने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई थी पुनर्विचार याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 के फैसले में राफेल डील को तय प्रक्रिया के तहत होना बताया था। अदालत ने उस वक्त डील को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने डील के दस्तावेजों के आधार पर इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं। इनमें कुछ गोपनीय दस्तावेजों की फोटो कॉपी लगाई गई थीं। इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र की ओर से आपत्ति दर्ज कराई थी थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के तहत विशेषाधिकार वाले गोपनीय दस्तावेजों की प्रतियों को पुनर्विचार याचिका का आधार नहीं बनाया जा सकता। शीर्ष अदालत ने उनकी यह दलील खारिज कर दी थी।
Wednesday, April 10, 2019
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में बीजेपी विधायक समेत पाँच की मौत
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले में एक नक्सली हमले में भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक समेत पाँच लोगों की मौत हो गई है.
छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीआईजी पी सुंदरराज ने पत्रकारों को बताया कि हमले में दंतेवाड़ा के विधायक भीमा मंडावी, उनके ड्राइवर और तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई है.
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि घटना के कारण मतदान की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ चुनाव आयोग ने कहा है कि "लोकसभा चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे."
दंतेवाड़ा में हुई घटना की जानकारी देते हुए दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया,"तीन बजे तक कैंपेन था, विधायक को 50 लोगों की लोकल फ़ोर्स सिक्योरिटी दी गई थी. तीन बजे वे बचेली में थे जहाँ से थाना प्रभारी के मना करने के बाद भी वो आगे निकल गए. कुआकोंडा से दो किलोमीटर पहले एक ब्लास्ट हुआ जिसमें विधायक और चार अन्य लोगों की मौत हो गई."
एसपी ने कहा,"हमने सबसे कहा था कि तीन बजे के बाद कैंपेन बंद हो रहा है और तीन बजे के बाद केवल घर-घर जाकर शहरी इलाक़ों में ही कैंपेन करें, अंदरूनी इलाक़े में ना करें, पर उनका इलाक़ा देखा हुआ था, तो उन्होंने हल्के में लिया, और बीच में एक मेले में भी रुके जिससे उनका लोकेशन भी आउट हो गया."
एसपी ने बताया कि आईईडी (विस्फोटक) सड़क के बीचोंबीच लगी थी जिससे बुलेटप्रूफ़ गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और सभी लोगों की मौक़े पर ही मौत हो गई.
धमाका दंतेवाड़ा-सुकमा रोड पर नकुलनार नाम की जगह पर हुआ जो इतना ज़बरदस्त था कि गाड़ी 200 मीटर दूर जा गिरी.
एसपी ने ये भी कहा कि दोनों तरफ़ से लगभग आधे घंटे तक भारी गोलीबारी भी हुई.
विधायक के पीछे वाली गाड़ी पर भी हमला हुआ जिसमें पाँच लोग थे. इन पाँच लोगों का फ़ोन लग रहा है और लौटाने की कोशिश की जा रही है.
अधिकारी ने बताया कि धमाका जितना बड़ा था उससे ऐसा अनुमान है कि आईईडी की मात्रा 50 किलोग्राम से ज़्यादा ही होगी.
दंतेवाड़ा में 11 अप्रैल को पहले चरण का चुनाव होना है. हमला चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन हुआ.
छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीआईजी पी सुंदरराज ने पत्रकारों को बताया कि हमले में दंतेवाड़ा के विधायक भीमा मंडावी, उनके ड्राइवर और तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई है.
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि घटना के कारण मतदान की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ चुनाव आयोग ने कहा है कि "लोकसभा चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे."
दंतेवाड़ा में हुई घटना की जानकारी देते हुए दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया,"तीन बजे तक कैंपेन था, विधायक को 50 लोगों की लोकल फ़ोर्स सिक्योरिटी दी गई थी. तीन बजे वे बचेली में थे जहाँ से थाना प्रभारी के मना करने के बाद भी वो आगे निकल गए. कुआकोंडा से दो किलोमीटर पहले एक ब्लास्ट हुआ जिसमें विधायक और चार अन्य लोगों की मौत हो गई."
एसपी ने कहा,"हमने सबसे कहा था कि तीन बजे के बाद कैंपेन बंद हो रहा है और तीन बजे के बाद केवल घर-घर जाकर शहरी इलाक़ों में ही कैंपेन करें, अंदरूनी इलाक़े में ना करें, पर उनका इलाक़ा देखा हुआ था, तो उन्होंने हल्के में लिया, और बीच में एक मेले में भी रुके जिससे उनका लोकेशन भी आउट हो गया."
एसपी ने बताया कि आईईडी (विस्फोटक) सड़क के बीचोंबीच लगी थी जिससे बुलेटप्रूफ़ गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और सभी लोगों की मौक़े पर ही मौत हो गई.
धमाका दंतेवाड़ा-सुकमा रोड पर नकुलनार नाम की जगह पर हुआ जो इतना ज़बरदस्त था कि गाड़ी 200 मीटर दूर जा गिरी.
एसपी ने ये भी कहा कि दोनों तरफ़ से लगभग आधे घंटे तक भारी गोलीबारी भी हुई.
विधायक के पीछे वाली गाड़ी पर भी हमला हुआ जिसमें पाँच लोग थे. इन पाँच लोगों का फ़ोन लग रहा है और लौटाने की कोशिश की जा रही है.
अधिकारी ने बताया कि धमाका जितना बड़ा था उससे ऐसा अनुमान है कि आईईडी की मात्रा 50 किलोग्राम से ज़्यादा ही होगी.
दंतेवाड़ा में 11 अप्रैल को पहले चरण का चुनाव होना है. हमला चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन हुआ.
Tuesday, April 2, 2019
पहले चरण के उम्मीदवार: उप्र-बिहार में वंशवाद हावी, आंध्र-तेलंगाना में उद्योगपतियों पर भरोसा
नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के पहले चरण के तहत 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। दैनिक भास्कर प्लस ऐप ने इन 91 सीटों के प्रमुख 182 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया तो पाया कि दक्षिण भारत के राज्यों में जहां तेदेपा, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस जैसी प्रमुख पार्टियों ने सबसे ज्यादा उद्योगपतियों पर भरोसा जताया, वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों में परिवारवाद को तरजीह मिली। 11 अप्रैल को जिन सीटों पर वोटिंग होगी, वहां प्रमुख राजनीतिक दलों ने सबसे ज्यादा 44 टिकट उद्योगपतियों को दिए हैं। 38 टिकट परिवारवाद के तहत बांटे गए।
उप्र में पहले चरण में 8 सीटों पर वोटिंग, 7 उम्मीदवार नेताओं के रिश्तेदार
राज्य की 8 में से 4 लोकसभा सीटों पर सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने परिवारवाद को प्राथमिकता दी, जबकि भाजपा ने तीन सीटों पर पूर्व विधायकों के बेटों को टिकट दिया। जैसे मुजफ्फरनगर से रालोद प्रमुख अजीत सिंह मैदान में हैं, उनके बेटे जयंत चौधरी बागपत से चुनाव लड़ रहे हैं। अजीत सिंह के पिता चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री रहे हैं। इसी तरह सहारनपुर से कांग्रेस के इमरान मसूद चुनाव लड़ रहे हैं। चाचा राशिद मसूद अलग-अलग पार्टियों से सांसद रहे हैं और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। कैराना से सपा ने तबस्सुम हसन को टिकट दिया है। उनके ससुर अख्तर हसन और पति मुनव्वर हसन कैराना से ही सांसद रह चुके हैं।
बिहार : चारों सीटों पर परिवारवाद, पासवान के बेटे को दूसरी बार टिकट
राज्य की चार सीटों पर पहले चरण में वोटिंग हाेगी। यहां जमुई से लोजपा के चिराग पासवान दूसरी बार मैदान में हैं। इनके पिता रामविलास पासवान लोजपा प्रमुख हैं। गया से जदयू ने विजय कुमार मांझी को टिकट दिया है। वे कारोबारी हैं। उनकी मां भगवती देवी सांसद थीं। नवादा में लोजपा प्रत्याशी चंदन कुमार बिहार के बाहुबली नेता सूरजभान सिंह के भाई हैं। नवादा से राजद ने विभा देवी काे टिकट दिया है। उनके पति राजवल्लभ यादव विधायक रहे हैं। भाजपा ने औरंगाबाद से सुशील कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। उनके पिता रामनरेश सिंह दो बार सांसद रहे हैं।
उत्तराखंड
जिन 5 सीटों पर पहले चरण में वोटिंग होगी, उनमें से टिहरी गढ़वाल सीट पर कांग्रेस ने 8 बार के विधायक रहे गुलाब सिंह के बेटे प्रीतम सिंह और गढ़वाल सीट पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी को उतारा है।
आंध्र: तेदेपा ने 11 और वाईएसआरसी ने 10 उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिया
आंध्रप्रदेश की सभी 25 लोकसभा सीटों पर पहले चरण में वोटिंग होगी। यहां तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसी के बीच मुकाबला है। 11 सीटों पर तेदेपा ने उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिया है, जबकि वाईएसआरसी ने ऐसे 10 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।
मोदी सरकार में नागर विमानन मंत्री रहे अशोक गजपति राजू विजयनगरम से तेदेपा उम्मीदवार हैं। वे पूर्व राजपरिवार से आते हैं और आंध्र के बड़े उद्योगपतियों में शामिल हैं। विशाखापट्टनम से एमवी श्रीभरत तेदेपा के टिकट पर मैदान में हैं। श्रीभरत उद्योगपति हैं। उनके दादा एमवीवीएस मूर्ति तेदेपा नेता और गीतम यूनिवर्सिटी के संस्थापक रहे हैं।
दोनों ही पार्टियों ने 5-5 सीटों पर पूर्व नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिया है। बड़े चेहरों में तेदेपा ने अमलापुरम सीट से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालायोगी के बेटे गंती हरीश मधुर को टिकट दिया है। उनके सामने वाईएसआरसी ने पूर्व सांसद चिंता कृष्णमूर्ति की बेटी चिंता अनुराधा मैदान में हैं। जबकि, कड़प्पा सीट से वाईएसआरसी ने वाईएस जगन मोहन रेड्डी के चचेरे भाई वाईएस अविनाश रेड्डी को टिकट दिया है। उनके सामने तेदेपा से आदिनारायण रेड्डी हैं। विजयवाड़ा से वाईएसआरसी उम्मीदवार वीरा प्रसाद कई शॉपिंग मॉल्स के मालिक हैं।
तेलंगाना: निजामाबाद से सीएम की बेटी मैदान में, कांग्रेस ने 5 सीटों पर उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिया
राज्य की सभी 17 सीटों पर पहले चरण में वोटिंग होगी। राज्य की सत्ताधारी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने 5-5 सीटों पर उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिए हैं। टीआरएस ने 4 सीटों पर नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिए हैं, जबकि कांग्रेस ने सभी सीटों पर अपने नेता या दूसरी पार्टी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए नेताओं को ही टिकट दिए हैं।
तेलंगाना की निजामाबाद से मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी के. कविता मैदान में हैं। वे यहां से 2014 में भी जीत चुकी हैं। उनके सामने कांग्रेस ने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे बिजनेसमैन अनिल कुमार को टिकट दिया है। निजामाबाद के अलावा आदिलाबाद, मलकाजगिरी और सिकंदराबाद से भी टीआरएस ने किसी न किसी नेता के रिश्तेदार को उतारा है।
एआईएमआईएम प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी चौथी बार हैदराबाद सीट से मैदान में हैं। वे ओवैसी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के चेयरमैन भी हैं। ओवैसी के दादा ही इस पार्टी के संस्थापक थे। असदउद्दीन के पिता विधायक रह चुके हैं।
अन्य सीटों का हाल
अंडमान-निकोबार सीट पर कांग्रेस ने उद्योगपति कुलदीप राय शर्मा को टिकट दिया है। कुलदीप कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भी हैं। उनके सामने भाजपा ने भी अपने प्रदेशाध्यक्ष और लीगल प्रेक्टिशनर विशाल जॉली को उतारा है।
वहीं, पहले चरण में ओडिशा की जिन 4 सीटों पर वोटिंग होनी है, उनमें से तीन सीटों पर बीजू जनता दल (बीजेडी) ने परिवारवाद को प्राथमिकता दी है। यहां की कालाहांडी सीट से बीजेडी ने पूर्व विधायक चंद्रभानू सिंह देव के बेटे पुष्पेंद्र सिंह देव, नबरंगपुर सीट से पूर्व विधायक जाधव माझी के बेटे रमेश चंद्र माझी और कोरापुट से मौजूदा सांसद झीना हिकाका की पत्नी कौशल्या हिकाका को टिकट दिया है। वहीं, बेहरामपुर सीट से भाजपा ने भी पूर्व विधायक हरीश चंद्र बक्सीपात्रा के बेटे भरुगु बक्सीपात्रा को टिकट दिया है।
मेघालय की तुरा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री की बहन आमने-सामने हैं। यहां से एनपीपी उम्मीदवार अगाथा संगमा, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की बहन और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा की बेटी हैं। उनके सामने अप्रैल 2010 से मार्च 2018 तक मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. मुकुल संगमा हैं।
उप्र में पहले चरण में 8 सीटों पर वोटिंग, 7 उम्मीदवार नेताओं के रिश्तेदार
राज्य की 8 में से 4 लोकसभा सीटों पर सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने परिवारवाद को प्राथमिकता दी, जबकि भाजपा ने तीन सीटों पर पूर्व विधायकों के बेटों को टिकट दिया। जैसे मुजफ्फरनगर से रालोद प्रमुख अजीत सिंह मैदान में हैं, उनके बेटे जयंत चौधरी बागपत से चुनाव लड़ रहे हैं। अजीत सिंह के पिता चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री रहे हैं। इसी तरह सहारनपुर से कांग्रेस के इमरान मसूद चुनाव लड़ रहे हैं। चाचा राशिद मसूद अलग-अलग पार्टियों से सांसद रहे हैं और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। कैराना से सपा ने तबस्सुम हसन को टिकट दिया है। उनके ससुर अख्तर हसन और पति मुनव्वर हसन कैराना से ही सांसद रह चुके हैं।
बिहार : चारों सीटों पर परिवारवाद, पासवान के बेटे को दूसरी बार टिकट
राज्य की चार सीटों पर पहले चरण में वोटिंग हाेगी। यहां जमुई से लोजपा के चिराग पासवान दूसरी बार मैदान में हैं। इनके पिता रामविलास पासवान लोजपा प्रमुख हैं। गया से जदयू ने विजय कुमार मांझी को टिकट दिया है। वे कारोबारी हैं। उनकी मां भगवती देवी सांसद थीं। नवादा में लोजपा प्रत्याशी चंदन कुमार बिहार के बाहुबली नेता सूरजभान सिंह के भाई हैं। नवादा से राजद ने विभा देवी काे टिकट दिया है। उनके पति राजवल्लभ यादव विधायक रहे हैं। भाजपा ने औरंगाबाद से सुशील कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। उनके पिता रामनरेश सिंह दो बार सांसद रहे हैं।
उत्तराखंड
जिन 5 सीटों पर पहले चरण में वोटिंग होगी, उनमें से टिहरी गढ़वाल सीट पर कांग्रेस ने 8 बार के विधायक रहे गुलाब सिंह के बेटे प्रीतम सिंह और गढ़वाल सीट पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी को उतारा है।
आंध्र: तेदेपा ने 11 और वाईएसआरसी ने 10 उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिया
आंध्रप्रदेश की सभी 25 लोकसभा सीटों पर पहले चरण में वोटिंग होगी। यहां तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसी के बीच मुकाबला है। 11 सीटों पर तेदेपा ने उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिया है, जबकि वाईएसआरसी ने ऐसे 10 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।
मोदी सरकार में नागर विमानन मंत्री रहे अशोक गजपति राजू विजयनगरम से तेदेपा उम्मीदवार हैं। वे पूर्व राजपरिवार से आते हैं और आंध्र के बड़े उद्योगपतियों में शामिल हैं। विशाखापट्टनम से एमवी श्रीभरत तेदेपा के टिकट पर मैदान में हैं। श्रीभरत उद्योगपति हैं। उनके दादा एमवीवीएस मूर्ति तेदेपा नेता और गीतम यूनिवर्सिटी के संस्थापक रहे हैं।
दोनों ही पार्टियों ने 5-5 सीटों पर पूर्व नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिया है। बड़े चेहरों में तेदेपा ने अमलापुरम सीट से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालायोगी के बेटे गंती हरीश मधुर को टिकट दिया है। उनके सामने वाईएसआरसी ने पूर्व सांसद चिंता कृष्णमूर्ति की बेटी चिंता अनुराधा मैदान में हैं। जबकि, कड़प्पा सीट से वाईएसआरसी ने वाईएस जगन मोहन रेड्डी के चचेरे भाई वाईएस अविनाश रेड्डी को टिकट दिया है। उनके सामने तेदेपा से आदिनारायण रेड्डी हैं। विजयवाड़ा से वाईएसआरसी उम्मीदवार वीरा प्रसाद कई शॉपिंग मॉल्स के मालिक हैं।
तेलंगाना: निजामाबाद से सीएम की बेटी मैदान में, कांग्रेस ने 5 सीटों पर उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिया
राज्य की सभी 17 सीटों पर पहले चरण में वोटिंग होगी। राज्य की सत्ताधारी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने 5-5 सीटों पर उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिए हैं। टीआरएस ने 4 सीटों पर नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिए हैं, जबकि कांग्रेस ने सभी सीटों पर अपने नेता या दूसरी पार्टी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए नेताओं को ही टिकट दिए हैं।
तेलंगाना की निजामाबाद से मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी के. कविता मैदान में हैं। वे यहां से 2014 में भी जीत चुकी हैं। उनके सामने कांग्रेस ने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे बिजनेसमैन अनिल कुमार को टिकट दिया है। निजामाबाद के अलावा आदिलाबाद, मलकाजगिरी और सिकंदराबाद से भी टीआरएस ने किसी न किसी नेता के रिश्तेदार को उतारा है।
एआईएमआईएम प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी चौथी बार हैदराबाद सीट से मैदान में हैं। वे ओवैसी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के चेयरमैन भी हैं। ओवैसी के दादा ही इस पार्टी के संस्थापक थे। असदउद्दीन के पिता विधायक रह चुके हैं।
अन्य सीटों का हाल
अंडमान-निकोबार सीट पर कांग्रेस ने उद्योगपति कुलदीप राय शर्मा को टिकट दिया है। कुलदीप कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भी हैं। उनके सामने भाजपा ने भी अपने प्रदेशाध्यक्ष और लीगल प्रेक्टिशनर विशाल जॉली को उतारा है।
वहीं, पहले चरण में ओडिशा की जिन 4 सीटों पर वोटिंग होनी है, उनमें से तीन सीटों पर बीजू जनता दल (बीजेडी) ने परिवारवाद को प्राथमिकता दी है। यहां की कालाहांडी सीट से बीजेडी ने पूर्व विधायक चंद्रभानू सिंह देव के बेटे पुष्पेंद्र सिंह देव, नबरंगपुर सीट से पूर्व विधायक जाधव माझी के बेटे रमेश चंद्र माझी और कोरापुट से मौजूदा सांसद झीना हिकाका की पत्नी कौशल्या हिकाका को टिकट दिया है। वहीं, बेहरामपुर सीट से भाजपा ने भी पूर्व विधायक हरीश चंद्र बक्सीपात्रा के बेटे भरुगु बक्सीपात्रा को टिकट दिया है।
मेघालय की तुरा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री की बहन आमने-सामने हैं। यहां से एनपीपी उम्मीदवार अगाथा संगमा, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की बहन और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा की बेटी हैं। उनके सामने अप्रैल 2010 से मार्च 2018 तक मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. मुकुल संगमा हैं।
Tuesday, March 26, 2019
ट्रेन में अब कर सकेंगे शॉपिंग, रेलवे किचन एप्लायंस से लेकर फिटनेस तक का सामान बेचेगा
लुधियाना (पंजाब). रेलवे अब जल्द ही लंबी दूरी की पैसेंजर्स ट्रेन में शॉपिंग की सुविधा देने जा रहा है। पैसेंजर्स को ट्रेन में ही होम प्रोडक्ट, किचन एप्लायंस, फिटनेस और एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) बेचे जाएंगे। पश्चिम रेलवे ने इस प्रोजेक्ट का ट्रायल इस साल जनवरी में शुरू किया था, जिसे अच्छा रिस्पांस मिला। अब रेल मंत्रालय इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी कर रहा है।
योजना के तहत लोकसभा चुनाव के बाद रेलवे के सभी जोन इसके लिए टेंडर निकालेंगे। इससे पहले साल 2017 में ट्रेनों में बच्चों के लिए गर्म दूध और बेबी फूड के लिए रेलवे ने जननी सेवा शुरू की गई थी, जो थोड़े समय बाद ही बंद हो गई थी। इसे भी दोबारा शुरू किया जाएगा।
कामयाब रहा ट्रायल : रेल मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम रेलवे की 16 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में शॉपिंग की सुविधा ट्रायल बेस पर शुरू की थी। अच्छा रिस्पांस मिलने पर जनवरी महीने में इन ट्रेन का करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए में तीन साल का टेंडर दिया गया था। अब इस सुविधा को जल्द ही पूरे देश की मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में शुरू किया जाएगा।
यात्रियों को खरीददारी के लिए मिलेगा कैटलॉग : यात्रियों को ट्रेन में सफर के दौरान पसंद का खाना, किचन इस्तेमाल की आइटम, दूध, ब्रेड, साबुन, दांतों की सफाई, शेविंग, डिटर्जेंट, बल्ब, बैटरी, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान उपलब्ध करवाए जाएंगे। ट्रेनों में सामान बेचने के लिए सुबह 8 से रात 9 बजे का समय निर्धारित होगा। इन सारी चीजों के लिए यात्रियों को कैटलॉग दिया जाएगा, जिसमें रेट लिखे होंगे।
डेबिट-क्रेडिट कार्ड से पेमेंट कर सकेंगे यात्री: लोगों को अवैध वेंडरों और जाली सामान मिलने से बचाने के लिए हर शॉपिंग कार्ट में ठेकेदार की ओर से अधिकृत दो सेल्समैन वर्दी और आईकार्ड पहन कर मौजूद रहेंगे। कोई भी सामान खरीदने के लिए पैसेंजर कैश देने के साथ ही क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भी पेमेंट कर सकेंगे।
दोबारा शुरू होगी जननी सेवा : रेलवे की ओर से साल 2017 में ट्रेनों में छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले यात्रियों के लिए जननी सेवा नाम से सुविधा शुरू की गई थी। इसमें आईआरसीटीसी के काउंटरों पर बेबी फूड रखने के निर्देश जारी किए थे। वहीं, छोटे बच्चों के लिए बेबी फूड, गर्म दूध, गर्म पानी, डाइपर समेत अन्य जरूरत का सामान भी देना शुरू किया गया था। इसके लिए यात्रियों का रिस्पांस काफी अच्छा था, लेकिन सही व्यवस्था न बन पाने के कारण कुछ समय बाद ही यह सुविधा ठप हो गई। रेलवे सूत्रों की मानें तो अब इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि अब इसके लिए कड़े रूल बनाए जा रहे हैं जिसमें इन निर्देशों का पालन न करने वाले ठेकेदारों और वेंडरों पर कार्रवाई का भी प्रावधान रहेगा।
योजना के तहत लोकसभा चुनाव के बाद रेलवे के सभी जोन इसके लिए टेंडर निकालेंगे। इससे पहले साल 2017 में ट्रेनों में बच्चों के लिए गर्म दूध और बेबी फूड के लिए रेलवे ने जननी सेवा शुरू की गई थी, जो थोड़े समय बाद ही बंद हो गई थी। इसे भी दोबारा शुरू किया जाएगा।
कामयाब रहा ट्रायल : रेल मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम रेलवे की 16 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में शॉपिंग की सुविधा ट्रायल बेस पर शुरू की थी। अच्छा रिस्पांस मिलने पर जनवरी महीने में इन ट्रेन का करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए में तीन साल का टेंडर दिया गया था। अब इस सुविधा को जल्द ही पूरे देश की मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में शुरू किया जाएगा।
यात्रियों को खरीददारी के लिए मिलेगा कैटलॉग : यात्रियों को ट्रेन में सफर के दौरान पसंद का खाना, किचन इस्तेमाल की आइटम, दूध, ब्रेड, साबुन, दांतों की सफाई, शेविंग, डिटर्जेंट, बल्ब, बैटरी, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान उपलब्ध करवाए जाएंगे। ट्रेनों में सामान बेचने के लिए सुबह 8 से रात 9 बजे का समय निर्धारित होगा। इन सारी चीजों के लिए यात्रियों को कैटलॉग दिया जाएगा, जिसमें रेट लिखे होंगे।
डेबिट-क्रेडिट कार्ड से पेमेंट कर सकेंगे यात्री: लोगों को अवैध वेंडरों और जाली सामान मिलने से बचाने के लिए हर शॉपिंग कार्ट में ठेकेदार की ओर से अधिकृत दो सेल्समैन वर्दी और आईकार्ड पहन कर मौजूद रहेंगे। कोई भी सामान खरीदने के लिए पैसेंजर कैश देने के साथ ही क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भी पेमेंट कर सकेंगे।
दोबारा शुरू होगी जननी सेवा : रेलवे की ओर से साल 2017 में ट्रेनों में छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले यात्रियों के लिए जननी सेवा नाम से सुविधा शुरू की गई थी। इसमें आईआरसीटीसी के काउंटरों पर बेबी फूड रखने के निर्देश जारी किए थे। वहीं, छोटे बच्चों के लिए बेबी फूड, गर्म दूध, गर्म पानी, डाइपर समेत अन्य जरूरत का सामान भी देना शुरू किया गया था। इसके लिए यात्रियों का रिस्पांस काफी अच्छा था, लेकिन सही व्यवस्था न बन पाने के कारण कुछ समय बाद ही यह सुविधा ठप हो गई। रेलवे सूत्रों की मानें तो अब इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि अब इसके लिए कड़े रूल बनाए जा रहे हैं जिसमें इन निर्देशों का पालन न करने वाले ठेकेदारों और वेंडरों पर कार्रवाई का भी प्रावधान रहेगा।
Wednesday, March 20, 2019
लंदन से पढ़ीं अमरमणि की बेटी तनुश्री चुनावी मैदान में, योगी के गढ़ में BJP को देंगी टक्कर
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के मुखिया शिवपाल यादव ने लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची मंगलवार को जारी कर दी. पहली सूची में 31 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया गया है. सूची में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके अमरमणि त्रिपाठी की बेटी तनुश्री त्रिपाठी का भी नाम है. तनुश्री को पार्टी ने महाराजगंज लोकसभा सीट से टिकट दिया है.
पहली बार चुनावी मैदान में उतरीं तनुश्री के सामने कई सारी चुनौतियां हैं. तनुश्री ऐसी सीट पर किस्मत आजमा रही हैं जिसे भारतीय जनता पार्टी का गढ़ कहा जाता है. बीजेपी के पंकज चौधरी यहां के सांसद हैं. यह इलाका राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है. टिकट मिलने के बाद आजतक से बातचीत करते हुए तनुश्री ने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी.
जब उनसे पूछा गया कि आपने क्यों महाराजगंज ही सीट चुनी तो उन्होंने कहा कि मैंने महाराजगंज सीट नहीं चुनी, इस सीट ने मुझे चुना है. उन्होंने कहा कि जो भी हुआ अचानक हुआ. मैंने कभी टिकट नहीं मांगा था. लेकिन हां अगर मुझे टिकट मिला है तो मैं इसका स्वागत करती हूं और पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगी.
उन्होंने कहा कि महाराजगंज के अंतर्गत आने वाली विधानसभा की 5 सीटों में से 3 सीटें नौतनवां, फरेंदा और सिसवा के लोग हमारे साथ हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि हमें ही जीत मिलेगी. उन्होंने कहा कि 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाई अमनमणि के प्रचार में हमने हिस्सा लिया था. उस दौरान बहुत कुछ सीखने को मिला था, जिसका फायदा इस चुनाव में मिलेगा.
तनुश्री ने आगे कहा कि यहां के सांसद पंकज चौधरी को लेकर लोगों में गुस्सा है. लोगों का मानना है कि ऐसे सांसद की क्या जरूरत जो क्षेत्र के लिए काम न करे. किसानों में खासतौर से पंकज चौधरी के खिलाफ नाराजगी है. यहां के लोगों के पास विकल्प की कमी है.
11 जनवरी 1990 को गोरखपुर में जन्मी तनुश्री को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता अमरमणि त्रिपाठी यूपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं. फिलहाल वे मुधमिता शुक्ला हत्याकांड में सजा काट रहे हैं. तनुश्री के भाई अमनमणि त्रिपाठी नौतनवां विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक हैं. अमनमणि की हाल के दिनों में सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात को लेकर फोटो सामने आई थी. जब aajtak.in ने तनुश्री से सवाल किया कि क्या अमनमणि बीजेपी में अपना भविष्य देख रहे हैं तो उन्होंने कहा कि पिता अमरमणि के योगी आदित्यनाथ से अच्छे संबंध रहे हैं. अमनमणि योगी से मुलाकात करते रहते हैं. वह उनसे राजनीति के गुर सीखते रहते हैं.
नैनीताल के सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल से स्कूली पढ़ाई करने वालीं तनुश्री कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के फुलटाइम राजनीति में आने से खुश हैं. उन्होंने कहा कि प्रियंका का आना एक महिला के तौर पर अच्छी बात है. उनके लिए सम्मान है. प्रियंका का फायदा कांग्रेस को जरूर मिलेगा. हालांकि इसका कितना फायदा होगा यह कहना मुश्किल है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से पढ़ाई कर चुकीं तनुश्री अपने पिता अमरमणि त्रिपाठी को अपना आदर्श मानती हैं. तनुश्री अपने भाई के साथ पिता के ही विरासत को आगे बढ़ा रही हैं. राजनीति जरूर उनको विरासत में मिली है, लेकिन संसद पहुंचने के लिए उनको मेहनत करनी पड़ेगी और उनके सामने कई सारी चुनौतियां हैं. इन सभी चुनौतियों से वो कैसे पार पाएंगी ये देखने वाली बात होगी.
पहली बार चुनावी मैदान में उतरीं तनुश्री के सामने कई सारी चुनौतियां हैं. तनुश्री ऐसी सीट पर किस्मत आजमा रही हैं जिसे भारतीय जनता पार्टी का गढ़ कहा जाता है. बीजेपी के पंकज चौधरी यहां के सांसद हैं. यह इलाका राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है. टिकट मिलने के बाद आजतक से बातचीत करते हुए तनुश्री ने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी.
जब उनसे पूछा गया कि आपने क्यों महाराजगंज ही सीट चुनी तो उन्होंने कहा कि मैंने महाराजगंज सीट नहीं चुनी, इस सीट ने मुझे चुना है. उन्होंने कहा कि जो भी हुआ अचानक हुआ. मैंने कभी टिकट नहीं मांगा था. लेकिन हां अगर मुझे टिकट मिला है तो मैं इसका स्वागत करती हूं और पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगी.
उन्होंने कहा कि महाराजगंज के अंतर्गत आने वाली विधानसभा की 5 सीटों में से 3 सीटें नौतनवां, फरेंदा और सिसवा के लोग हमारे साथ हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि हमें ही जीत मिलेगी. उन्होंने कहा कि 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाई अमनमणि के प्रचार में हमने हिस्सा लिया था. उस दौरान बहुत कुछ सीखने को मिला था, जिसका फायदा इस चुनाव में मिलेगा.
तनुश्री ने आगे कहा कि यहां के सांसद पंकज चौधरी को लेकर लोगों में गुस्सा है. लोगों का मानना है कि ऐसे सांसद की क्या जरूरत जो क्षेत्र के लिए काम न करे. किसानों में खासतौर से पंकज चौधरी के खिलाफ नाराजगी है. यहां के लोगों के पास विकल्प की कमी है.
11 जनवरी 1990 को गोरखपुर में जन्मी तनुश्री को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता अमरमणि त्रिपाठी यूपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं. फिलहाल वे मुधमिता शुक्ला हत्याकांड में सजा काट रहे हैं. तनुश्री के भाई अमनमणि त्रिपाठी नौतनवां विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक हैं. अमनमणि की हाल के दिनों में सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात को लेकर फोटो सामने आई थी. जब aajtak.in ने तनुश्री से सवाल किया कि क्या अमनमणि बीजेपी में अपना भविष्य देख रहे हैं तो उन्होंने कहा कि पिता अमरमणि के योगी आदित्यनाथ से अच्छे संबंध रहे हैं. अमनमणि योगी से मुलाकात करते रहते हैं. वह उनसे राजनीति के गुर सीखते रहते हैं.
नैनीताल के सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल से स्कूली पढ़ाई करने वालीं तनुश्री कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के फुलटाइम राजनीति में आने से खुश हैं. उन्होंने कहा कि प्रियंका का आना एक महिला के तौर पर अच्छी बात है. उनके लिए सम्मान है. प्रियंका का फायदा कांग्रेस को जरूर मिलेगा. हालांकि इसका कितना फायदा होगा यह कहना मुश्किल है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से पढ़ाई कर चुकीं तनुश्री अपने पिता अमरमणि त्रिपाठी को अपना आदर्श मानती हैं. तनुश्री अपने भाई के साथ पिता के ही विरासत को आगे बढ़ा रही हैं. राजनीति जरूर उनको विरासत में मिली है, लेकिन संसद पहुंचने के लिए उनको मेहनत करनी पड़ेगी और उनके सामने कई सारी चुनौतियां हैं. इन सभी चुनौतियों से वो कैसे पार पाएंगी ये देखने वाली बात होगी.
Friday, March 8, 2019
सुप्रीम कोर्ट ने मामला मध्यस्थों के पास भेजा, प्रक्रिया 4 हफ्ते में शुरू और 8 हफ्ते में खत्म होगी
नई दिल्ली. अयोध्या विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्यस्थों को सौंप दिया। मध्यस्थता की बातचीत फैजाबाद में होगी। जस्टिस फकीर मुहम्मद खलीफुल्ला मध्यस्थता पैनल की अध्यक्षता करेंगे। इस पैनल में श्री श्री रविशंकर और वकील श्रीराम पंचू भी होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैनल 4 हफ्ते में मध्यस्थता के जरिए विवाद निपटाने की प्रक्रिया शुरू करे। 8 हफ्ते में यह प्रक्रिया खत्म हो जानी चाहिए।
'पूरी प्रक्रिया गोपनीय होगी'
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया कोर्ट की निगरानी में होगी और इसे गोपनीय रखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़े तो मध्यस्थ और लोगों को पैनल में शामिल कर सकते हैं। वे कानूनी सहायता भी ले सकते हैं।
मध्यस्थों को उत्तरप्रदेश सरकार फैजाबाद में सारी सुविधाएं मुहैया कराएगी।
मध्यस्थता के माहिर रहे हैं पंचू
जस्टिस खलीफुल्ला : मूल रूप से तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में कराईकुडी के रहने वाले हैं। उनका जन्म 23 जुलाई 1951 को हुआ था। 1975 में उन्होंने वकालत शुरू की थी। वे मद्रास हाईकोर्ट में न्यायाधीश और इसके बाद जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रहे। उन्हें 2000 में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के तौर नियुक्त किया गया। 2011 में उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
श्रीराम पंचू : वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू मध्यस्थता से केस सुलझाने में माहिर माने जाते हैं। कोर्ट से बाहर केस सुलझाने के लिए उन्होंने ‘द मीडिएशन चैंबर’ नाम की संस्था भी बनाई है। वे एसोसिएशन ऑफ इंडियन मीडिएटर्स के अध्यक्ष हैं। वे बोर्ड ऑफ इंटरनेशनल मीडिएशन इंस्टीट्यूट के बोर्ड में भी शामिल रहे हैं। असम और नागालैंड के बीच 500 किलोमीटर भूभाग का मामला सुलझाने के लिए उन्हें मध्यस्थ नियुक्त किया गया था।
श्रीश्री रविशंकर : आध्यात्मिक गुरु हैं। वे अयोध्या मामले में मध्यस्थता की निजी तौर पर कोशिश करते रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने पक्षकारों से मुलाकात की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस मसले को सुलझाने का एक फॉर्मूला भी पेश किया था।
'लक्ष्य की ओर चलना है'
श्रीश्री रविशंकर ने ट्वीट किया, "सबका सम्मान करना, सपनों को साकार करना, सदियों के संघर्ष का सुखांत करना और समाज में समरसता बनाए रखना - इस लक्ष्य की ओर सबको चलना है।"
'मुस्लिमों को अयोध्या पर दावा छोड़ना चाहिए'
अयोध्या मामले को मध्यस्थ को सौंपे जाने को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अगर मुस्लिमों में अयोध्या पर अपना दावा नहीं छोड़ा तो भारत सीरिया बन जाएगा। श्रीश्री को मध्यस्थ पैनल में शामिल करने पर ओवैसी ने कहा कि यह बेहतर होता कि सुप्रीम कोर्ट किसी तटस्थ व्यक्ति को नियुक्त करता।
14 अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर हो रही है। अदालत ने सुनवाई में केंद्र की उस याचिका को भी शामिल किया है, जिसमें सरकार ने गैर विवादित जमीन को उनके मालिकों को लौटाने की मांग की है।
1986: प्रधानमंत्री राजीव गांधी के वक्त तब के कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रेसिडेंट अली मियां नादवी के बीच बातचीत शुरू हुई थी, लेकिन नाकाम रही।
1990: तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर राव ने दोनों समुदायों के बीच गतिरोध तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने उत्तरप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार और राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत की मध्यस्थता में बात कराई, लेकिन कोई बात नहीं बनी।
1992: तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने भी इस विवाद को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की। विवादित ढांचा गिराने के बाद उन्होंने जस्टिस लिब्रहान की अध्यक्षता में एक जांच कमीशन भी बनाया, जिसने 2009 में अपनी रिपोर्ट दी।
2002: अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी सरकार में हिंदू-मुस्लिम नेताओं से इस मसले पर बात करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी शत्रुघ्न सिन्हा की अध्यक्षता में अयोध्या सेल बनाया, लेकिन ये कोशिश भी नाकाम रही।
2003 से 2017 के बीच भी हुई कोशिशें
2003: कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की बात कही।
2010: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के तत्कालीन चीफ जस्टिस धर्मवीर शर्मा ने इस मसले को बातचीत से सुलझाने का सुझाव दिया।
2016: ऑल इंडिया हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी और मुस्लिम पक्ष की तरफ से दायर याचिकाओं की अगुआई करने वाले मोहम्मद हाशिम अंसारी के बीच मुलाकात हुई। अंसारी ने हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत ज्ञान दास से भी बातचीत शुरू की। बातचीत में योजना बनाई कि विवादित 70 एकड़ पर मंदिर और मस्जिद का निर्माण किया जाए और दोनों के बीच 100 फीट की दीवार रहे।
2016: मई में ऑल इंडिया अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने भी अंसारी से मुलाकात की, लेकिन बातचीत आगे बढ़ती, इससे पहले ही अंसारी का निधन हो गया। इसके बाद इसी साल रिटायर्ड जज जस्टिस पलक बसु ने भी कोर्ट के बाहर समझौते से इस मसले को सुलझाने का सुझाव दिया।
2017: मार्च में सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर सुनवाई के दौरान एक बार फिर मध्यस्थता की पेशकश की। तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने सुझाव दिया कि अगर दोनों पक्ष कोर्ट के बाहर इस मसले को सुलझाने के लिए राजी हैं, तो कोर्ट मध्यस्थता करने को तैयार है।
2017: नवंबर में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने भी इस मामले को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की। उन्होंने दूसरे पक्ष से कई मुलाकात भी कीं, लेकिन इस बातचीत का कोई हल नहीं निकला।
'पूरी प्रक्रिया गोपनीय होगी'
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया कोर्ट की निगरानी में होगी और इसे गोपनीय रखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़े तो मध्यस्थ और लोगों को पैनल में शामिल कर सकते हैं। वे कानूनी सहायता भी ले सकते हैं।
मध्यस्थों को उत्तरप्रदेश सरकार फैजाबाद में सारी सुविधाएं मुहैया कराएगी।
मध्यस्थता के माहिर रहे हैं पंचू
जस्टिस खलीफुल्ला : मूल रूप से तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में कराईकुडी के रहने वाले हैं। उनका जन्म 23 जुलाई 1951 को हुआ था। 1975 में उन्होंने वकालत शुरू की थी। वे मद्रास हाईकोर्ट में न्यायाधीश और इसके बाद जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रहे। उन्हें 2000 में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के तौर नियुक्त किया गया। 2011 में उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
श्रीराम पंचू : वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू मध्यस्थता से केस सुलझाने में माहिर माने जाते हैं। कोर्ट से बाहर केस सुलझाने के लिए उन्होंने ‘द मीडिएशन चैंबर’ नाम की संस्था भी बनाई है। वे एसोसिएशन ऑफ इंडियन मीडिएटर्स के अध्यक्ष हैं। वे बोर्ड ऑफ इंटरनेशनल मीडिएशन इंस्टीट्यूट के बोर्ड में भी शामिल रहे हैं। असम और नागालैंड के बीच 500 किलोमीटर भूभाग का मामला सुलझाने के लिए उन्हें मध्यस्थ नियुक्त किया गया था।
श्रीश्री रविशंकर : आध्यात्मिक गुरु हैं। वे अयोध्या मामले में मध्यस्थता की निजी तौर पर कोशिश करते रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने पक्षकारों से मुलाकात की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस मसले को सुलझाने का एक फॉर्मूला भी पेश किया था।
'लक्ष्य की ओर चलना है'
श्रीश्री रविशंकर ने ट्वीट किया, "सबका सम्मान करना, सपनों को साकार करना, सदियों के संघर्ष का सुखांत करना और समाज में समरसता बनाए रखना - इस लक्ष्य की ओर सबको चलना है।"
'मुस्लिमों को अयोध्या पर दावा छोड़ना चाहिए'
अयोध्या मामले को मध्यस्थ को सौंपे जाने को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अगर मुस्लिमों में अयोध्या पर अपना दावा नहीं छोड़ा तो भारत सीरिया बन जाएगा। श्रीश्री को मध्यस्थ पैनल में शामिल करने पर ओवैसी ने कहा कि यह बेहतर होता कि सुप्रीम कोर्ट किसी तटस्थ व्यक्ति को नियुक्त करता।
14 अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर हो रही है। अदालत ने सुनवाई में केंद्र की उस याचिका को भी शामिल किया है, जिसमें सरकार ने गैर विवादित जमीन को उनके मालिकों को लौटाने की मांग की है।
1986: प्रधानमंत्री राजीव गांधी के वक्त तब के कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रेसिडेंट अली मियां नादवी के बीच बातचीत शुरू हुई थी, लेकिन नाकाम रही।
1990: तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर राव ने दोनों समुदायों के बीच गतिरोध तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने उत्तरप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार और राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत की मध्यस्थता में बात कराई, लेकिन कोई बात नहीं बनी।
1992: तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने भी इस विवाद को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की। विवादित ढांचा गिराने के बाद उन्होंने जस्टिस लिब्रहान की अध्यक्षता में एक जांच कमीशन भी बनाया, जिसने 2009 में अपनी रिपोर्ट दी।
2002: अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी सरकार में हिंदू-मुस्लिम नेताओं से इस मसले पर बात करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी शत्रुघ्न सिन्हा की अध्यक्षता में अयोध्या सेल बनाया, लेकिन ये कोशिश भी नाकाम रही।
2003 से 2017 के बीच भी हुई कोशिशें
2003: कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की बात कही।
2010: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के तत्कालीन चीफ जस्टिस धर्मवीर शर्मा ने इस मसले को बातचीत से सुलझाने का सुझाव दिया।
2016: ऑल इंडिया हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी और मुस्लिम पक्ष की तरफ से दायर याचिकाओं की अगुआई करने वाले मोहम्मद हाशिम अंसारी के बीच मुलाकात हुई। अंसारी ने हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत ज्ञान दास से भी बातचीत शुरू की। बातचीत में योजना बनाई कि विवादित 70 एकड़ पर मंदिर और मस्जिद का निर्माण किया जाए और दोनों के बीच 100 फीट की दीवार रहे।
2016: मई में ऑल इंडिया अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने भी अंसारी से मुलाकात की, लेकिन बातचीत आगे बढ़ती, इससे पहले ही अंसारी का निधन हो गया। इसके बाद इसी साल रिटायर्ड जज जस्टिस पलक बसु ने भी कोर्ट के बाहर समझौते से इस मसले को सुलझाने का सुझाव दिया।
2017: मार्च में सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर सुनवाई के दौरान एक बार फिर मध्यस्थता की पेशकश की। तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने सुझाव दिया कि अगर दोनों पक्ष कोर्ट के बाहर इस मसले को सुलझाने के लिए राजी हैं, तो कोर्ट मध्यस्थता करने को तैयार है।
2017: नवंबर में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने भी इस मामले को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की। उन्होंने दूसरे पक्ष से कई मुलाकात भी कीं, लेकिन इस बातचीत का कोई हल नहीं निकला।
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