Wednesday, April 10, 2019

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में बीजेपी विधायक समेत पाँच की मौत

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले में एक नक्सली हमले में भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक समेत पाँच लोगों की मौत हो गई है.

छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीआईजी पी सुंदरराज ने पत्रकारों को बताया कि हमले में दंतेवाड़ा के विधायक भीमा मंडावी, उनके ड्राइवर और तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई है.

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि घटना के कारण मतदान की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ चुनाव आयोग ने कहा है कि "लोकसभा चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे."

दंतेवाड़ा में हुई घटना की जानकारी देते हुए दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया,"तीन बजे तक कैंपेन था, विधायक को 50 लोगों की लोकल फ़ोर्स सिक्योरिटी दी गई थी. तीन बजे वे बचेली में थे जहाँ से थाना प्रभारी के मना करने के बाद भी वो आगे निकल गए. कुआकोंडा से दो किलोमीटर पहले एक ब्लास्ट हुआ जिसमें विधायक और चार अन्य लोगों की मौत हो गई."

एसपी ने कहा,"हमने सबसे कहा था कि तीन बजे के बाद कैंपेन बंद हो रहा है और तीन बजे के बाद केवल घर-घर जाकर शहरी इलाक़ों में ही कैंपेन करें, अंदरूनी इलाक़े में ना करें, पर उनका इलाक़ा देखा हुआ था, तो उन्होंने हल्के में लिया, और बीच में एक मेले में भी रुके जिससे उनका लोकेशन भी आउट हो गया."

एसपी ने बताया कि आईईडी (विस्फोटक) सड़क के बीचोंबीच लगी थी जिससे बुलेटप्रूफ़ गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और सभी लोगों की मौक़े पर ही मौत हो गई.

धमाका दंतेवाड़ा-सुकमा रोड पर नकुलनार नाम की जगह पर हुआ जो इतना ज़बरदस्त था कि गाड़ी 200 मीटर दूर जा गिरी.

एसपी ने ये भी कहा कि दोनों तरफ़ से लगभग आधे घंटे तक भारी गोलीबारी भी हुई.

विधायक के पीछे वाली गाड़ी पर भी हमला हुआ जिसमें पाँच लोग थे. इन पाँच लोगों का फ़ोन लग रहा है और लौटाने की कोशिश की जा रही है.

अधिकारी ने बताया कि धमाका जितना बड़ा था उससे ऐसा अनुमान है कि आईईडी की मात्रा 50 किलोग्राम से ज़्यादा ही होगी.

दंतेवाड़ा में 11 अप्रैल को पहले चरण का चुनाव होना है. हमला चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन हुआ.

Tuesday, April 2, 2019

पहले चरण के उम्मीदवार: उप्र-बिहार में वंशवाद हावी, आंध्र-तेलंगाना में उद्योगपतियों पर भरोसा

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के पहले चरण के तहत 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। दैनिक भास्कर प्लस ऐप ने इन 91 सीटों के प्रमुख 182 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया तो पाया कि दक्षिण भारत के राज्यों में जहां तेदेपा, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस जैसी प्रमुख पार्टियों ने सबसे ज्यादा उद्योगपतियों पर भरोसा जताया, वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों में परिवारवाद को तरजीह मिली। 11 अप्रैल को जिन सीटों पर वोटिंग होगी, वहां प्रमुख राजनीतिक दलों ने सबसे ज्यादा 44 टिकट उद्योगपतियों को दिए हैं। 38 टिकट परिवारवाद के तहत बांटे गए।

उप्र में पहले चरण में 8 सीटों पर वोटिंग, 7 उम्मीदवार नेताओं के रिश्तेदार
राज्य की 8 में से 4 लोकसभा सीटों पर सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने परिवारवाद को प्राथमिकता दी, जबकि भाजपा ने तीन सीटों पर पूर्व विधायकों के बेटों को टिकट दिया। जैसे मुजफ्फरनगर से रालोद प्रमुख अजीत सिंह मैदान में हैं, उनके बेटे जयंत चौधरी बागपत से चुनाव लड़ रहे हैं। अजीत सिंह के पिता चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री रहे हैं। इसी तरह सहारनपुर से कांग्रेस के इमरान मसूद चुनाव लड़ रहे हैं। चाचा राशिद मसूद अलग-अलग पार्टियों से सांसद रहे हैं और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। कैराना से सपा ने तबस्सुम हसन को टिकट दिया है। उनके ससुर अख्तर हसन और पति मुनव्वर हसन कैराना से ही सांसद रह चुके हैं।

बिहार : चारों सीटों पर परिवारवाद, पासवान के बेटे को दूसरी बार टिकट
राज्य की चार सीटों पर पहले चरण में वोटिंग हाेगी। यहां जमुई से लोजपा के चिराग पासवान दूसरी बार मैदान में हैं। इनके पिता रामविलास पासवान लोजपा प्रमुख हैं। गया से जदयू ने विजय कुमार मांझी को टिकट दिया है। वे कारोबारी हैं। उनकी मां भगवती देवी सांसद थीं। नवादा में लोजपा प्रत्याशी चंदन कुमार बिहार के बाहुबली नेता सूरजभान सिंह के भाई हैं। नवादा से राजद ने विभा देवी काे टिकट दिया है। उनके पति राजवल्लभ यादव विधायक रहे हैं। भाजपा ने औरंगाबाद से सुशील कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। उनके पिता रामनरेश सिंह दो बार सांसद रहे हैं।

उत्तराखंड
जिन 5 सीटों पर पहले चरण में वोटिंग होगी, उनमें से टिहरी गढ़वाल सीट पर कांग्रेस ने 8 बार के विधायक रहे गुलाब सिंह के बेटे प्रीतम सिंह और गढ़वाल सीट पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी को उतारा है।

आंध्र: तेदेपा ने 11 और वाईएसआरसी ने 10 उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिया
आंध्रप्रदेश की सभी 25 लोकसभा सीटों पर पहले चरण में वोटिंग होगी। यहां तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसी के बीच मुकाबला है। 11 सीटों पर तेदेपा ने उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिया है, जबकि वाईएसआरसी ने ऐसे 10 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।

मोदी सरकार में नागर विमानन मंत्री रहे अशोक गजपति राजू विजयनगरम से तेदेपा उम्मीदवार हैं। वे पूर्व राजपरिवार से आते हैं और आंध्र के बड़े उद्योगपतियों में शामिल हैं। विशाखापट्टनम से एमवी श्रीभरत तेदेपा के टिकट पर मैदान में हैं। श्रीभरत उद्योगपति हैं। उनके दादा एमवीवीएस मूर्ति तेदेपा नेता और गीतम यूनिवर्सिटी के संस्थापक रहे हैं।

दोनों ही पार्टियों ने 5-5 सीटों पर पूर्व नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिया है। बड़े चेहरों में तेदेपा ने अमलापुरम सीट से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालायोगी के बेटे गंती हरीश मधुर को टिकट दिया है। उनके सामने वाईएसआरसी ने पूर्व सांसद चिंता कृष्णमूर्ति की बेटी चिंता अनुराधा मैदान में हैं। जबकि, कड़प्पा सीट से वाईएसआरसी ने वाईएस जगन मोहन रेड्डी के चचेरे भाई वाईएस अविनाश रेड्डी को टिकट दिया है। उनके सामने तेदेपा से आदिनारायण रेड्डी हैं। विजयवाड़ा से वाईएसआरसी उम्मीदवार वीरा प्रसाद कई शॉपिंग मॉल्स के मालिक हैं।

तेलंगाना: निजामाबाद से सीएम की बेटी मैदान में, कांग्रेस ने 5 सीटों पर उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिया

राज्य की सभी 17 सीटों पर पहले चरण में वोटिंग होगी। राज्य की सत्ताधारी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने 5-5 सीटों पर  उद्योगपतियों-कारोबारियों को टिकट दिए हैं। टीआरएस ने 4 सीटों पर नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिए हैं, जबकि कांग्रेस ने सभी सीटों पर अपने नेता या दूसरी पार्टी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए नेताओं को ही टिकट दिए हैं।

तेलंगाना की निजामाबाद से मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी के. कविता मैदान में हैं। वे यहां से 2014 में भी जीत चुकी हैं। उनके सामने कांग्रेस ने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे बिजनेसमैन अनिल कुमार को टिकट दिया है। निजामाबाद के अलावा आदिलाबाद, मलकाजगिरी और सिकंदराबाद से भी टीआरएस ने किसी न किसी नेता के रिश्तेदार को उतारा है।

एआईएमआईएम प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी चौथी बार हैदराबाद सीट से मैदान में हैं। वे ओवैसी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के चेयरमैन भी हैं। ओवैसी के दादा ही इस पार्टी के संस्थापक थे। असदउद्दीन के पिता विधायक रह चुके हैं।

अन्य सीटों का हाल
अंडमान-निकोबार सीट पर कांग्रेस ने उद्योगपति कुलदीप राय शर्मा को टिकट दिया है। कुलदीप कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भी हैं। उनके सामने भाजपा ने भी अपने प्रदेशाध्यक्ष और लीगल प्रेक्टिशनर विशाल जॉली को उतारा है।

वहीं, पहले चरण में ओडिशा की जिन 4 सीटों पर वोटिंग होनी है, उनमें से तीन सीटों पर बीजू जनता दल (बीजेडी) ने परिवारवाद को प्राथमिकता दी है। यहां की कालाहांडी सीट से बीजेडी ने पूर्व विधायक चंद्रभानू सिंह देव के बेटे पुष्पेंद्र सिंह देव, नबरंगपुर सीट से पूर्व विधायक जाधव माझी के बेटे रमेश चंद्र माझी और कोरापुट से मौजूदा सांसद झीना हिकाका की पत्नी कौशल्या हिकाका को टिकट दिया है। वहीं, बेहरामपुर सीट से भाजपा ने भी पूर्व विधायक हरीश चंद्र बक्सीपात्रा के बेटे भरुगु बक्सीपात्रा को टिकट दिया है।

मेघालय की तुरा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री की बहन आमने-सामने हैं। यहां से एनपीपी उम्मीदवार अगाथा संगमा, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की बहन और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा की बेटी हैं। उनके सामने अप्रैल 2010 से मार्च 2018 तक मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. मुकुल संगमा हैं।

Tuesday, March 26, 2019

ट्रेन में अब कर सकेंगे शॉपिंग, रेलवे किचन एप्लायंस से लेकर फिटनेस तक का सामान बेचेगा

लुधियाना (पंजाब).  रेलवे अब जल्द ही लंबी दूरी की पैसेंजर्स ट्रेन में शॉपिंग की सुविधा देने जा रहा है। पैसेंजर्स को ट्रेन में ही होम प्रोडक्ट, किचन एप्लायंस, फिटनेस और एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) बेचे जाएंगे। पश्चिम रेलवे ने इस प्रोजेक्ट का ट्रायल इस साल जनवरी में शुरू किया था, जिसे अच्छा रिस्पांस मिला। अब रेल मंत्रालय इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी कर रहा है।


योजना के तहत लोकसभा चुनाव के बाद रेलवे के सभी जोन इसके लिए टेंडर निकालेंगे। इससे पहले साल 2017 में ट्रेनों में बच्चों के लिए गर्म दूध और बेबी फूड के लिए रेलवे ने जननी सेवा शुरू की गई थी, जो थोड़े समय बाद ही बंद हो गई थी। इसे भी दोबारा शुरू किया जाएगा।

कामयाब रहा ट्रायल : रेल मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम रेलवे की 16 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में शॉपिंग की सुविधा ट्रायल बेस पर शुरू की थी। अच्छा रिस्पांस मिलने पर जनवरी महीने में इन ट्रेन का करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए में तीन साल का टेंडर दिया गया था। अब इस सुविधा को जल्द ही पूरे देश की मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में शुरू किया जाएगा।

यात्रियों को खरीददारी के लिए मिलेगा कैटलॉग : यात्रियों को ट्रेन में सफर के दौरान पसंद का खाना, किचन इस्तेमाल की आइटम, दूध, ब्रेड, साबुन, दांतों की सफाई, शेविंग, डिटर्जेंट, बल्ब, बैटरी, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान उपलब्ध करवाए जाएंगे। ट्रेनों में सामान बेचने के लिए सुबह 8 से रात 9 बजे का समय निर्धारित होगा। इन सारी चीजों के लिए यात्रियों को कैटलॉग दिया जाएगा, जिसमें रेट लिखे होंगे।

डेबिट-क्रेडिट कार्ड से पेमेंट कर सकेंगे यात्री: लोगों को अवैध वेंडरों और जाली सामान मिलने से बचाने के लिए हर शॉपिंग कार्ट में ठेकेदार की ओर से अधिकृत दो सेल्समैन वर्दी और आईकार्ड पहन कर मौजूद रहेंगे। कोई भी सामान खरीदने के लिए पैसेंजर कैश देने के साथ ही क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भी पेमेंट कर सकेंगे।

दोबारा शुरू होगी जननी सेवा : रेलवे की ओर से साल 2017 में ट्रेनों में छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले यात्रियों के लिए जननी सेवा नाम से सुविधा शुरू की गई थी। इसमें आईआरसीटीसी के काउंटरों पर बेबी फूड रखने के निर्देश जारी किए थे। वहीं, छोटे बच्चों के लिए बेबी फूड, गर्म दूध, गर्म पानी, डाइपर समेत अन्य जरूरत का सामान भी देना शुरू किया गया था। इसके लिए यात्रियों का रिस्पांस काफी अच्छा था, लेकिन सही व्यवस्था न बन पाने के कारण कुछ समय बाद ही यह सुविधा ठप हो गई। रेलवे सूत्रों की मानें तो अब इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि अब इसके लिए कड़े रूल बनाए जा रहे हैं जिसमें इन निर्देशों का पालन न करने वाले ठेकेदारों और वेंडरों पर कार्रवाई का भी प्रावधान रहेगा।

Wednesday, March 20, 2019

लंदन से पढ़ीं अमरमणि की बेटी तनुश्री चुनावी मैदान में, योगी के गढ़ में BJP को देंगी टक्कर

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के मुखिया शिवपाल यादव ने लोकसभा  चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची मंगलवार को जारी कर दी. पहली सूची में 31 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया गया है. सूची में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके अमरमणि त्रिपाठी की बेटी तनुश्री त्रिपाठी का भी नाम है. तनुश्री को पार्टी ने महाराजगंज लोकसभा सीट से टिकट दिया है.

पहली बार चुनावी मैदान में उतरीं तनुश्री के सामने कई सारी चुनौतियां हैं. तनुश्री ऐसी सीट पर किस्मत आजमा रही हैं जिसे भारतीय जनता पार्टी का गढ़ कहा जाता है. बीजेपी के पंकज चौधरी यहां के सांसद हैं. यह इलाका राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है. टिकट मिलने के बाद आजतक से बातचीत करते हुए तनुश्री ने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी.

जब उनसे पूछा गया कि आपने क्यों महाराजगंज ही सीट चुनी तो उन्होंने कहा कि मैंने महाराजगंज सीट नहीं चुनी, इस सीट ने मुझे चुना है. उन्होंने कहा कि जो भी हुआ अचानक हुआ. मैंने कभी टिकट नहीं मांगा था. लेकिन हां अगर मुझे टिकट मिला है तो मैं इसका स्वागत करती हूं और पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगी.

उन्होंने कहा कि महाराजगंज के अंतर्गत आने वाली विधानसभा की 5 सीटों में से 3 सीटें नौतनवां, फरेंदा और सिसवा के लोग हमारे साथ हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि हमें ही जीत मिलेगी. उन्होंने कहा कि 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाई अमनमणि के प्रचार में हमने हिस्सा लिया था. उस दौरान बहुत कुछ सीखने को मिला था, जिसका फायदा इस चुनाव में मिलेगा.

तनुश्री ने आगे कहा कि यहां के सांसद पंकज चौधरी को लेकर लोगों में गुस्सा है. लोगों का मानना है कि ऐसे सांसद की क्या जरूरत जो क्षेत्र के लिए काम न करे. किसानों में खासतौर से पंकज चौधरी के खिलाफ नाराजगी है. यहां के लोगों के पास विकल्प की कमी है.

11 जनवरी 1990 को गोरखपुर में जन्मी तनुश्री को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता अमरमणि त्रिपाठी यूपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं. फिलहाल वे मुधमिता शुक्ला हत्याकांड में सजा काट रहे हैं. तनुश्री के भाई अमनमणि त्रिपाठी नौतनवां विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक हैं. अमनमणि की हाल के दिनों में सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात को लेकर फोटो सामने आई थी. जब aajtak.in ने तनुश्री से सवाल किया कि क्या अमनमणि बीजेपी में अपना भविष्य देख रहे हैं तो उन्होंने कहा कि पिता अमरमणि के योगी आदित्यनाथ से अच्छे संबंध रहे हैं. अमनमणि योगी से मुलाकात करते रहते हैं. वह उनसे राजनीति के गुर सीखते रहते हैं.

नैनीताल के सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल से स्कूली पढ़ाई करने वालीं तनुश्री कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के फुलटाइम राजनीति में आने से खुश हैं. उन्होंने कहा कि प्रियंका का आना एक महिला के तौर पर अच्छी बात है. उनके लिए सम्मान है. प्रियंका का फायदा कांग्रेस को जरूर मिलेगा. हालांकि इसका कितना फायदा होगा यह कहना मुश्किल है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से पढ़ाई कर चुकीं तनुश्री अपने पिता अमरमणि त्रिपाठी को अपना आदर्श मानती हैं. तनुश्री अपने भाई के साथ पिता के ही विरासत को आगे बढ़ा रही हैं. राजनीति जरूर उनको विरासत में मिली है, लेकिन संसद पहुंचने के लिए उनको मेहनत करनी पड़ेगी और उनके सामने कई सारी चुनौतियां हैं. इन सभी चुनौतियों से वो कैसे पार पाएंगी ये देखने वाली बात होगी.

Friday, March 8, 2019

सुप्रीम कोर्ट ने मामला मध्यस्थों के पास भेजा, प्रक्रिया 4 हफ्ते में शुरू और 8 हफ्ते में खत्म होगी

नई दिल्ली. अयोध्या विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्यस्थों को सौंप दिया। मध्यस्थता की बातचीत फैजाबाद में होगी। जस्‍टिस फकीर मुहम्मद खलीफुल्‍ला मध्‍यस्‍थता पैनल की अध्‍यक्षता करेंगे। इस पैनल में श्री श्री रविशंकर और वकील श्रीराम पंचू भी होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैनल 4 हफ्ते में मध्यस्थता के जरिए विवाद निपटाने की प्रक्रिया शुरू करे। 8 हफ्ते में यह प्रक्रिया खत्म हो जानी चाहिए। 

'पूरी प्रक्रिया गोपनीय होगी'

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया कोर्ट की निगरानी में होगी और इसे गोपनीय रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़े तो मध्यस्थ और लोगों को पैनल में शामिल कर सकते हैं। वे कानूनी सहायता भी ले सकते हैं।

मध्यस्थों को उत्तरप्रदेश सरकार फैजाबाद में सारी सुविधाएं मुहैया कराएगी।
मध्यस्थता के माहिर रहे हैं पंचू

जस्टिस खलीफुल्ला : मूल रूप से तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में कराईकुडी के रहने वाले हैं। उनका जन्म 23 जुलाई 1951 को हुआ था। 1975 में उन्होंने वकालत शुरू की थी। वे मद्रास हाईकोर्ट में न्यायाधीश और इसके बाद जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रहे। उन्हें 2000 में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के तौर नियुक्त किया गया। 2011 में उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।

श्रीराम पंचू : वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू मध्यस्थता से केस सुलझाने में माहिर माने जाते हैं। कोर्ट से बाहर केस सुलझाने के लिए उन्होंने ‘द मीडिएशन चैंबर’ नाम की संस्था भी बनाई है। वे एसोसिएशन ऑफ इंडियन मीडिएटर्स के अध्यक्ष हैं। वे बोर्ड ऑफ इंटरनेशनल मीडिएशन इंस्टीट्यूट के बोर्ड में भी शामिल रहे हैं। असम और नागालैंड के बीच 500 किलोमीटर भूभाग का मामला सुलझाने के लिए उन्हें मध्यस्थ नियुक्त किया गया था।

श्रीश्री रविशंकर : आध्यात्मिक गुरु हैं। वे अयोध्या मामले में मध्यस्थता की निजी तौर पर कोशिश करते रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने पक्षकारों से मुलाकात की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस मसले को सुलझाने का एक फॉर्मूला भी पेश किया था।

'लक्ष्य की ओर चलना है'

श्रीश्री रविशंकर ने ट्वीट किया, "सबका सम्मान करना, सपनों को साकार करना, सदियों के संघर्ष का सुखांत करना और समाज में समरसता बनाए रखना - इस लक्ष्य की ओर सबको चलना है।"

'मुस्लिमों को अयोध्या पर दावा छोड़ना चाहिए'
अयोध्या मामले को मध्यस्थ को सौंपे जाने को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अगर मुस्लिमों में अयोध्या पर अपना दावा नहीं छोड़ा तो भारत सीरिया बन जाएगा। श्रीश्री को मध्यस्थ पैनल में शामिल करने पर ओवैसी ने कहा कि यह बेहतर होता कि सुप्रीम कोर्ट किसी तटस्थ व्यक्ति को नियुक्त करता। 

14 अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर हो रही है। अदालत ने सुनवाई में केंद्र की उस याचिका को भी शामिल किया है, जिसमें सरकार ने गैर विवादित जमीन को उनके मालिकों को लौटाने की मांग की है।

1986: प्रधानमंत्री राजीव गांधी के वक्त तब के कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रेसिडेंट अली मियां नादवी के बीच बातचीत शुरू हुई थी, लेकिन नाकाम रही।

1990: तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर राव ने दोनों समुदायों के बीच गतिरोध तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने उत्तरप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार और राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत की मध्यस्थता में बात कराई, लेकिन कोई बात नहीं बनी।

1992: तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने भी इस विवाद को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की। विवादित ढांचा गिराने के बाद उन्होंने जस्टिस लिब्रहान की अध्यक्षता में एक जांच कमीशन भी बनाया, जिसने 2009 में अपनी रिपोर्ट दी।

2002: अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी सरकार में हिंदू-मुस्लिम नेताओं से इस मसले पर बात करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी शत्रुघ्न सिन्हा की अध्यक्षता में अयोध्या सेल बनाया, लेकिन ये कोशिश भी नाकाम रही।

2003 से 2017 के बीच भी हुई कोशिशें
2003: कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की बात कही।

2010: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के तत्कालीन चीफ जस्टिस धर्मवीर शर्मा ने इस मसले को बातचीत से सुलझाने का सुझाव दिया।

2016: ऑल इंडिया हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी और मुस्लिम पक्ष की तरफ से दायर याचिकाओं की अगुआई करने वाले मोहम्मद हाशिम अंसारी के बीच मुलाकात हुई। अंसारी ने हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत ज्ञान दास से भी बातचीत शुरू की। बातचीत में योजना बनाई कि विवादित 70 एकड़ पर मंदिर और मस्जिद का निर्माण किया जाए और दोनों के बीच 100 फीट की दीवार रहे।

2016: मई में ऑल इंडिया अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने भी अंसारी से मुलाकात की, लेकिन बातचीत आगे बढ़ती, इससे पहले ही अंसारी का निधन हो गया। इसके बाद इसी साल रिटायर्ड जज जस्टिस पलक बसु ने भी कोर्ट के बाहर समझौते से इस मसले को सुलझाने का सुझाव दिया।

2017: मार्च में सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर सुनवाई के दौरान एक बार फिर मध्यस्थता की पेशकश की। तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने सुझाव दिया कि अगर दोनों पक्ष कोर्ट के बाहर इस मसले को सुलझाने के लिए राजी हैं, तो कोर्ट मध्यस्थता करने को तैयार है।

2017: नवंबर में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने भी इस मामले को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की। उन्होंने दूसरे पक्ष से कई मुलाकात भी कीं, लेकिन इस बातचीत का कोई हल नहीं निकला।

Wednesday, February 27, 2019

सुषमा ने कहा- हमने पाक के सैन्य प्रतिष्ठानों को नहीं बल्कि जैश के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया

बीजिंग. चीन के वुझेन में रूस-भारत-चीन के विदेश मंत्रियों की 16वीं बैठक चल रही है। इसमें सुषमा स्वराज ने पुलवामा हमले का मुद्दा उठाया। सुषमा ने पाक की सीमा में भारत के हमले को लेकर कहा कि यह कोई सैन्य अभियान नहीं था। इसमें पाक के किसी भी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया गया। केवल आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर कार्रवाई की गई। भारत किसी भी रूप से तनाव को बढ़ाना नहीं चाहता। हम जिम्मेदारी और संयम से काम करते रहेंगे। पुलवामा हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने मंगलवार तड़के पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमला कर जैश के कई ठिकानों को तबाह कर दिया था। इसमें 350 आतंकी मारे गए थे।

सुषमा ने कहा कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर आतंकी गुटों के होने और उन पर कार्रवाई करने से लगातार इनकार कर रहा था। वहीं, जैश भारत के कई हिस्सों में आतंकी हमले की साजिश कर रहा था। इसी वजह से हमारी सरकार को अचानक हमले का फैसला लेना पड़ा। हमने इस बात का ध्यान रखा कि कार्रवाई में किसी आम नागरिक की जान न जाए।

भारत की विदेश मंत्री के मुताबिक, पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद जैश और पाक में स्थित अन्य आतंकी गुटों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी कहा था। लेकिन पाक ने इसे गंभीरता से लेने की बजाय किसी भी तरह की कार्रवाई से इनकार कर दिया। साथ ही पुलवामा हमले में जैश का हाथ होने से साफतौर पर इनकार कर दिया।

सुषमा ने कहा कि ऐसे कायराना आतंकी हमले सभी देशों को आगाह करने वाले हैं। इसके खिलाफ जीरो टॉलरेंस दिखाने और निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। हाल ही में हुए पुलवामा हमले के बाद हम सचेत हैं। हमले में हमारे 40 जवान शहीद हुए थे। जैश कश्मीर में अपनी गतिविधियां संचालित करता है। इसे पाक से मदद भी मिलती है।

सुषमा ने बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूस के विदेश मंत्री सर्गे लावरोव के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वुहान में अनौपचारिक मुलाकात के बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी बेहतर हुए हैं।

भारत-चीन-रूस बोले- आतंकवाद से सख्ती से निपटेंगे
तीन देशों के विदेश मंत्रियों की 16वीं बैठक में संयुक्त बयान जारी किया गया। भारत-चीन-रूस ने आतंकवाद के किसी भी रूप की कड़े शब्दों में निंदा की। साथ ही कहा कि आतंकी गुटों को न तो किसी देश का समर्थन मिलना चाहिए न तो किसी देश को अपनी जमीन का इस्तेमाल होने देना चाहिए। आतंकियों और आतंकी गतिविधियों को समर्थन या उनके पालने-पोसने वालों पर केस चलना चाहिए।

Thursday, February 21, 2019

सुनील गावस्कर बोले- PAK से मैच नहीं खेलकर हम उन्हें वर्ल्ड कप में जीतने का मौका क्यों दें

पुलवामा आतंकी हमले के बाद देश भर में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से का माहौल है और पड़ोसी मुल्क से हर तरह के रिश्ते खत्म करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है. लेकिन, इन सब बातों से अलग पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने वर्ल्ड कप में पाकिस्तान से क्रिकेट को लेकर बड़ा बयान दिया है. सुनील गावस्कर ने कहा कि भारत अगर वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के साथ मैच नहीं खेलता है तो नुकसान उसे ही होगा. इंडिया टुडे से बातचीत में गावस्कर ने कहा, '2019 क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान को बाहर रखने की मांग पर दूसरे देश सहमत नहीं हुए तो भारत को ही नुकसान होगा.'

गावस्कर ने कहा, 'अगर हम पाकिस्तान से वर्ल्ड कप में मैच नहीं खेलते हैं, तो हम हारे हुए कहलाएंगे और उन्हें 2 अंक दे बैठेंगे. इसलिए सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि विश्व कप में अब उनके साथ खेलकर उन्हें हरा दें.' बता दें कि भारत विश्व कप में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से 16 जून को भिड़ेगा. भारत ने विश्व कप में हमेशा पाकिस्तान को हराया है. इससे पहले सीओए प्रमुख विनोद राय ने बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी को आईसीसी को पत्र लिखकर विश्व कप से पाकिस्तान को बाहर करने के लिए कहा था.

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पुलवामा आतंकी हमले के बाद देश भर में मांग है कि विराट कोहली की भारतीय टीम या तो पाकिस्तान से वर्ल्ड कप में मैच नहीं खेले या बीसीसीआई के प्रभाव का इस्तेमाल कर पाकिस्तान को विश्व कप टूर्नामेंट से बाहर कर दे. जानकारी के मुताबिक राहुल जौहरी 27 फरवरी को ICC के प्रस्तावित कार्यक्रम में पुलवामा हमले के बाद देश में गुस्से के माहौल का हवाला दे सकते हैं और वह आईसीसी से अपील करेंगे कि पाकिस्तान को क्रिकेट विश्व से बाहर किया जाए. इस पर गावस्कर ने कहा, 'BCCI पाकिस्तान को वर्ल्ड कप से बाहर करने की कोशिश कर सकती हैं. लेकिन, ऐसा होगा नहीं. क्योंकि, इसके लिए दूसरे सदस्य देशों की भी स्वीकृति चाहिए होगी.'

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गावस्कर ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अन्य सदस्य देश पाकिस्तान को वर्ल्ड कप से बाहर करने की स्वीकृति देंगे. लेकिन, भारत कोशिश कर सकता है कि पाकिस्तान को विश्व कप खेलने से रोका जाए.'

वो ऐसे फिदायीन तैयार कर रहा है, जो भारत में घुसकर फिर से आतंकी हमले को अंजाम दे सकें. खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने आजतक को जानकारी दी है, कि जम्मू कश्मीर में अब भी अलग-अलग संगठनों के 298 आतंकवादी मौजूद हैं.

सूत्रों की जानकारी के अनुसार कश्मीर घाटी में इस समय सबसे ज्यादा लश्कर के 80 पाकिस्तानी आतंकी और 55 स्थानीय आतंकी मौजूद हैं. इसके अलावा जैश-ए-मोहम्मद के 22 पाकिस्तानी आतंकी और 19 स्थानीय आतंकी कश्मीर में आज भी सक्रिय हैं.

सूत्रों ने यह दावा किया है कि इस समय पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई हिज्बुल मुजाहिदीन के विदेशी और स्थानीय आतंकवादियों पर ऑपरेशन के लिए भरोसा नहीं कर रही है. हालांकि हिज्बुल के स्थानीय आतंकियों की संख्या कश्मीर में 102 है जो सबसे ज्यादा है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस बात पर माथापच्ची कर रही हैं कि इन आतंकवादियों का खात्मा कैसे किया जाए.

आजतक को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक पुलवामा हमले के नौ दिन पहले मसूद अजहर ने पूरी सरकारी सुरक्षा में पेशावर जाकर अपनी साजिशों को पूरा करने के संकेत दिए थे. फिर भी पाकिस्तान अब इस घटना में उनके शामिल होने के सबूत मांग रहा है.

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